गुरुवार, 9 मार्च 2017

कपास के रोग
रोग
एंथ्रोकनोज़

हिन्दी नाम
एंथ्रोकनोज़
कारक जीवाणु
कोलिटोट्राइकम केपसीसी
लक्षण एवं क्षति
  1. फंफूद का आक्रमण अकुंर एवं गोले पर होता है।
  2. कॉटीलिडन पर छोटा लाल धब्बा बनता है।
  3. कॉलर भाग में लम्बा लाल भूरा धब्बा बनता है।
  4. डेडू की सभी अवस्थाओं पर आक्रमण होता है, शुरूवात में डेडू पर सूखा लाल से भूरे रंग का धब्बा बनता है जिनके केन्द्र समय के साथ काले हो जाते है।
नियंत्रण
  1. पानी का जमाव न होने दे।
  2. रोग ग्रस्त पौध अवशेषों को नष्ट करें।
  3. अम्ल उपचारित एवं कार्बेनडाजिम या बीनोमाइल से उपचारित बीजों का उपयोग करें।
  4. 1.5 ग्राम कार्बनडाजिम प्रति लीटर या 1.5 ग्राम बीनोमिल प्रति लीटर या 3.0 ग्राम मेनकोज़ेब प्रति लीटर का छिड़काव करे।
आई.पी. एम
  1. अम्ल उपचारित, प्रमाणित, प्रतिरोधित बीजों का उपयोग करें।
  2. सस्य क्रियायें जैसे खेत तैयारी,बीज दर, उर्वरक की मात्रा आदि उपायों को अपनाए।
  3. अंतिम चुनाई के बाद अवशेषों को नष्ट करें।
  4. फसल की सामान्य अवधि न बढ़ाए और पुराने ठुठों को अलग कर दे।

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